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Hyla arborea

Hyla arborea

कोई दर्ज सामान्य नाम नहीं

LCसंकटमुक्त
एक छोटा, पतला मेढ़क जिसकी पीठ हरे रंग की चिकनी त्वचा से ढकी है, पेट सफेदी-भूरे दानेदार त्वचा वाला है, आँख से लेकर कमर तक एक गहरी भूरी रेखा चलती है, और पंजों की उंगलियों पर गोल चिपकने वाली डिस्कें स्पष्ट दिखती हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

माप

जीवनकाल
≤ 22 वर्ष
वर्गीकरण
संघ
Chordata
वर्ग
Amphibia
गण
Anura
कुल
Hylidae
वंश
Hyla
प्रजाति
Hyla arborea

एक समय Hyla arborea को यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ्रीका के विशाल भू-भाग में फैली प्रजाति माना जाता था, लेकिन आनुवंशिक अध्ययनों के बाद इसमें शामिल कई समूहों को अलग प्रजातियाँ घोषित कर दिया गया, जिससे वास्तविक Hyla arborea का दायरा अब फ्रांस से पोलैंड और यूनान तक फैले यूरोप तक सीमित रह गया है।

यह उभयचर वर्ग, एनुरा गण और हाइलिडाए कुल का एक छोटा वृक्षवासी मेढ़क है, जो मुख्यतः यूरोप के आर्द्र क्षेत्रों में रहता है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, फिर भी इसकी आबादी में गिरावट का रुख देखा गया है।

अपनी चिपकने वाली उंगली-डिस्कों और मौसम के अनुसार बदलते रंग के कारण यह प्रजाति यूरोपीय जीव-जगत में विशेष स्थान रखती है, और इसका अध्ययन उभयचरों के व्यवहार, प्रजनन-नीति और आवास-संरक्षण को समझने में सहायक रहा है।

पहचान और रूप

इस मेढ़क की सबसे पहचान योग्य विशेषता इसकी उंगलियों पर मौजूद गोल चिपकने वाली डिस्कें हैं, जिनकी मदद से यह पेड़ों और झाड़ियों पर आसानी से चढ़ सकता है।

आकार में यह छोटा और पतला होता है, पैर लंबे होते हैं। नर की लंबाई सामान्यतः 32 से 43 मिलीमीटर तक होती है, जबकि मादा 40 से 50 मिलीमीटर तक बड़ी हो सकती है। पीठ की त्वचा चिकनी होती है और तापमान, नमी या मेढ़क के "मूड" के अनुसार हरे, धूसर या भूरे रंग में बदलती रहती है, जबकि पेट की त्वचा दानेदार और सफेदी रंग की होती है। पीठ और पेट के रंग के बीच आँख से लेकर कमर तक एक गहरी भूरी पार्श्व-रेखा साफ दिखाई देती है।

नर और मादा में स्पष्ट अंतर होता है — मादा का गला सफेद रहता है, जबकि नर का गला सुनहरा-भूरा होता है और उसमें बड़ी, तह वाली स्वर-थैली (वोकल सैक) होती है जिसका उपयोग वह पुकारने में करता है। सिर गोलाकार होता है, होंठ तेजी से ढलान लिए होते हैं, पुतली क्षैतिज अंडाकार आकार की होती है और कान का पर्दा (टिम्पैनम) स्पष्ट रूप से दिखता है।

पिछली टांगें अगली टांगों की तुलना में कहीं अधिक बड़ी और शक्तिशाली होती हैं, जिससे यह मेढ़क तेज़ी से लंबी कूद लगा सकता है — यह क्षमता इसे शिकार पकड़ने और शत्रुओं से बचने दोनों में मदद करती है।

वितरण और आवास

Hyla arborea मुख्यतः पश्चिमी और मध्य यूरोप से लेकर पोलैंड और यूनान तक फैला हुआ है, और ब्रिटेन को छोड़कर यूरोप के अधिकांश भागों में इसकी मौजूदगी दर्ज है। ब्रिटेन में इसे कृत्रिम रूप से लाया गया था, पर वहाँ इसकी आबादी अब विलुप्त मानी जाती है।

यह प्रजाति दलदली भूमि, नम घास के मैदानों, रीड-बेड, पार्कों, बगीचों, अंगूर के बागों, फलों के बागानों, नदी किनारों, झील तटों तथा नम या शुष्क वनों में पाई जाती है। यह घने और अंधेरे जंगलों से दूर रहती है, लेकिन कुछ सूखे मौसमों को सहन करने की क्षमता के कारण कभी-कभी शुष्क स्थलों में भी मिल जाती है।

महीनेवार उपस्थिति के आँकड़ों में मई महीने में सर्वाधिक दर्ज (लगभग 47,843) देखी गई है, जबकि जून और जुलाई में भी संख्या ऊँची बनी रहती है; इसके विपरीत दिसंबर से फरवरी तक यह संख्या बहुत कम (सैकड़ों में) रह जाती है। यह प्रवृत्ति संभवतः वसंत-ग्रीष्म प्रजनन काल में मेढ़कों की अधिक सक्रियता और शीत ऋतु में शीतनिष्क्रियता (हाइबरनेशन) को दर्शाती है, न कि वास्तविक आबादी के आकार को, क्योंकि ये आँकड़े केवल उपस्थिति के अवलोकन हैं।

Hyla arborea के दर्ज अवलोकनों का नक्शा
जहाँ इसे दर्ज किया गया है · GBIF
47,843
जन॰फ़र॰मार्चअप्रैलमईजूनजुल॰अग॰सित॰अक्टू॰नव॰दिस॰
मासिक घटना गणना · GBIF

व्यवहार और जीवनशैली

ऐतिहासिक रूप से इस मेढ़क का उपयोग एक प्रकार के "बैरोमीटर" के रूप में किया जाता था, क्योंकि यह वर्षा आने से पहले अधिक टर्राने लगता है, जिससे लोग मौसम बदलने का अनुमान लगाते थे।

इसकी त्वचा का रंग तापमान, नमी और मेढ़क के "मूड" के अनुसार चमकीले हरे से लेकर धूसर, भूरे और पीले तक बदल सकता है, जो इसे परिवेश में छिपने और तापमान नियंत्रण दोनों में सहायता करता है।

भोजन की दृष्टि से यह मुख्यतः मकड़ियों, मक्खियों, भृंगों, तितलियों और रोमहीन इल्लियों जैसे छोटे संधिपादों को खाता है; इसकी लंबी कूद लगाने की क्षमता इसे तेज़ी से उड़ने वाले कीड़ों को भी पकड़ने में सक्षम बनाती है, जो इसके आहार का बड़ा हिस्सा बनते हैं।

ठंड के मौसम में यह दीवारों की दरारों, तहखानों, पत्थरों के नीचे, वनस्पति के झुरमुटों या पत्तियों और खाद के ढेरों में दबकर शीतनिष्क्रिय (हाइबरनेट) हो जाता है।

प्रजनन और जीवन चक्र

प्रजनन काल मार्च के अंत से जून तक चलता है, जब यह मेढ़क तालाबों, झीलों, दलदलों, जलाशयों और कभी-कभी छोटे गड्ढों जैसे स्थिर जलस्रोतों में अंडे देने के लिए एकत्र होता है।

वसंत की बारिश के बाद नर निचली वनस्पति या छिछले तालाबों से टर्राकर मादाओं को आकर्षित करते हैं, और यहाँ तक कि प्रजनन स्थलों की ओर प्रवास के दौरान भी टर्राते रहते हैं। एक ही प्रजनन मौसम में नर बार-बार अपना प्रजनन तालाब बदल सकते हैं।

मादा एक बार में लगभग 800 से 1000 अंडे अखरोट के आकार के गुच्छों में देती है; प्रत्येक अंडे का व्यास लगभग 1.5 मिलीमीटर होता है। अंडे 10 से 14 दिनों में फूट जाते हैं, और लगभग तीन महीने बाद टैडपोल पूर्ण मेढ़क में रूपांतरित हो जाते हैं — यह रूपांतरण मुख्यतः जुलाई के अंत से अगस्त की शुरुआत तक अपने चरम पर होता है।

जंगल में यह मेढ़क सामान्यतः 15 वर्ष तक जीवित रह सकता है, हालांकि कुछ अभिलेखों में इसकी आयु 22 वर्ष तक भी दर्ज की गई है।

संरक्षण और खतरे

IUCN की रेड लिस्ट Hyla arborea को "संकटमुक्त" (Least Concern) श्रेणी में रखती है, क्योंकि इसका वितरण-क्षेत्र विस्तृत है, आबादी बड़ी मानी जाती है, और इसके इतनी तेज़ी से घटने की संभावना नहीं है कि यह अधिक संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाए। इसके बावजूद, IUCN के अनुसार इसकी आबादी का रुख घटता हुआ (decreasing) है।

सबसे बड़े खतरों में आवासों का विखंडन और विनाश, आर्द्रभूमियों का प्रदूषण, मछलियों द्वारा शिकार, पालतू व्यापार के लिए पकड़ा जाना, और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। ट्राउट मछली को विशेष रूप से इस मेढ़क का शिकार करते देखा गया है, और जिन तालाबों में ट्राउट डाली गई, वहाँ इसकी आबादी में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इनके अलावा बढ़ती UVB किरणें, कीटनाशक, रासायनिक खाद और अन्य प्रदूषक भी गिरावट के संभावित कारण माने जाते हैं।

1980 के दशक से शुरू हुए आवास-पुनर्स्थापन प्रयासों ने कई स्थानों पर आबादी बढ़ाने में सफलता पाई है। इनमें नए प्रजनन तालाबों का निर्माण, प्रजनन स्थलों को जोड़ने वाले "आवास गलियारे" बनाना, और पुनःस्थापन (reintroduction) कार्यक्रम शामिल हैं, जो स्वीडन, लातविया और डेनमार्क में सफल रहे हैं। आवास संरक्षण को इस प्रजाति को बचाने की सबसे महत्वपूर्ण रणनीति माना गया है।

संरक्षण स्थिति

  1. LC
  2. NT
  3. VU
  4. EN
  5. CR

संकटमुक्त

सांस्कृतिक महत्व

Hyla नाम की उत्पत्ति ग्रीक शब्द "हाइले" (hyle) से हुई है, जिसका अर्थ है "वन" या "जंगल"। ग्रीक पौराणिक कथाओं में हाइलस (Hylas) हरक्यूलिस का एक युवा साथी था, जो अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता था और जल लेने जाते समय रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था — यह नाम प्रकृति, वनों और युवा सौंदर्य की छवि जगाता है।

जीनस का नाम इसी हाइलस की कथा से लिया गया है, और व्याकरणिक रूप से यह स्त्रीलिंग माना जाता है, जो एक पुरुष पात्र के नाम पर आधारित होने के बावजूद एक रोचक भाषाई विशेषता है।

रोचक तथ्य

  1. वैज्ञानिक प्रमाणों से पता चलता है कि Hyla प्रजातियों में नर-नर के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा (यौन चयन) भी साथी चयन को प्रभावित करती है, हालांकि इसका अध्ययन मादा चयन जितना नहीं हुआ है।
  2. आनुवंशिक वंशवृक्ष विश्लेषण में Hyla arborea को दो अन्य यूरेशियाई प्रजातियों — Hyla annectans और Hyla savignyi — के साथ एक समूह में रखा गया है, जो उत्तरी अमेरिका की 11 प्रजातियों और एशियाई Hyla japonica वाले बड़े समूह की सहोदर शाखा मानी जाती है।
  3. जीनस नाम Hyla व्याकरणिक रूप से स्त्रीलिंग है, जबकि इसका मूल एक पुरुष पौराणिक पात्र हाइलस से जुड़ा है — यह एक असामान्य भाषाई संयोग है।

पारिस्थितिकी

आवास

  • आर्द्रभूमि
  • वन
  • मीठा जल
  • घास का मैदान

व्यवहार

  • परभक्षी
  • शीतनिष्क्रिय
  • वृक्षवासी

आहार

  • कीटभक्षी

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एक छोटा, पतला मेढ़क जिसकी पीठ हरे रंग की चिकनी त्वचा से ढकी है, पेट सफेदी-भूरे दानेदार त्वचा वाला है, आँख से लेकर कमर तक एक गहरी भूरी रेखा चलती है, और पंजों की उंगलियों पर गोल चिपकने वाली डिस्कें स्पष्ट दिखती हैंफ़ोटो: via iNaturalist, licensed under CC0 1.0., CC0

स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaAnAge