सामान्य डॉल्फ़िन विश्व की सबसे प्रचुर सिटेशियन प्रजाति है, जिसकी अनुमानित वैश्विक आबादी लगभग 60 लाख है। यह Delphinus वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति है और डेल्फ़िनिडे कुल के डेल्फ़िनिनाए उपकुल की प्रारूप प्रजाति भी है।
यह स्तनधारी वर्ग, सिटेशिया गण और डेल्फ़िनिडे कुल से संबंधित है, और विश्व भर के गर्म व शीतोष्ण महासागरों में तटीय तथा गहरे दोनों प्रकार के जल में पाई जाती है। IUCN की रेड लिस्ट में इसे "कम चिंताजनक" श्रेणी में रखा गया है।
बॉटलनोज़, हम्पबैक, स्ट्राइप्ड, स्पिनर और स्पॉटेड डॉल्फ़िन जैसी प्रजातियों से घनिष्ठ संबंध रखने वाली यह डॉल्फ़िन अपनी सामाजिकता, फुर्तीलेपन और जहाजों के साथ खेलने की आदत के कारण नाविकों और वैज्ञानिकों दोनों के लिए दिलचस्प बनी रहती है।
पहचान और रूप
सबसे पहचानने योग्य विशेषता इसका "घंटे के आकार" (hourglass) का पैटर्न है, जो शरीर के दोनों किनारों पर दिखता है - आगे का हिस्सा हल्के धूसर, पीले या सुनहरे रंग का होता है जबकि पीछे का हिस्सा गहरे धूसर रंग का।
यह मध्यम आकार की डॉल्फ़िन है, जिसकी लंबाई सामान्यतः 1.9 से 2.5 मीटर के बीच होती है और वज़न 80 से 235 किलोग्राम तक हो सकता है, हालांकि अधिकतर व्यक्ति 80 से 150 किलोग्राम के दायरे में आते हैं। नर सामान्यतः मादाओं की तुलना में अधिक लंबे और भारी होते हैं।
शरीर के ऊपरी हिस्से पर गहरा धूसर या काला रंग होता है और नीचे की तरफ सफेद रंग, जिससे "काउंटरशेडिंग" बनती है और यह समुद्र में छिपने में सहायक होती है।
इसकी चोंच जैसी रोस्ट्रम लंबी और पतली होती है, जिसके हर जबड़े के हर तरफ 50 से 60 तक छोटे, नुकीले और आपस में गुंथे हुए दांत होते हैं, जो फिसलनदार मछलियों और स्क्विड को पकड़ने के लिए उपयुक्त हैं।
वितरण और आवास
यह प्रजाति तटीय और महासागरीय दोनों प्रकार के जल में रहती है, बिना किसी स्पष्ट आबादी विभाजन के; हालांकि तटीय क्षेत्रों में यह सामान्यतः बाहरी, गहरे हिस्सों में पाई जाती है और खाड़ियों (गल्फ) के भीतरी हिस्सों में इसकी उपस्थिति की कोई पुष्ट रिपोर्ट नहीं है।
यह प्रजाति सतह के तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से अधिक वाले जल को प्राथमिकता देती है और 180 मीटर से कम गहराई वाले जल में कम ही दिखाई देती है। सामान्यतः यह 5 से 7 मील प्रति घंटे की गति से तैरती है, लेकिन शिकार के पीछे भागते समय 29 मील प्रति घंटे तक की गति पकड़ सकती है और 48 घंटों में 150 से 200 मील तक की दूरी तय कर सकती है।
झुंड समुद्र तल की प्रमुख भौगोलिक संरचनाओं के साथ-साथ चलते और गोता लगाते हैं, और उनकी गतिविधियाँ कुछ मछली प्रजातियों की मौसमी आबादी में बदलाव के साथ मेल खाती हैं।
वैश्विक अवलोकन आंकड़ों में जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक दर्ज प्रविष्टियाँ (क्रमशः 15,238 और 14,791) मिलती हैं, जो गर्मियों के मौसम में अधिक सतही उपस्थिति का संकेत दे सकती हैं; लेकिन ये आँकड़े केवल अवलोकन दर्ज करने की घटनाएँ हैं, न कि प्रजाति की सम्पूर्ण सीमा या आबादी घनत्व का प्रत्यक्ष माप।

व्यवहार और जीवनशैली
सामान्य डॉल्फ़िन अत्यंत सामाजिक प्राणी है और शायद ही कभी अकेली देखी जाती है; झुंड का आकार बेहद परिवर्तनशील होता है - कुछ झुंडों में केवल 50-60 सदस्य होते हैं जबकि अन्य में 1,000 से लेकर 100,000 तक व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। झुंड साथ में तैरते हैं, साथ में भोजन करते हैं और यहाँ तक कि साथ में सांस भी लेते हैं।
उच्च अक्षांशों में जब शरद ऋतु के पहले तूफ़ान समुद्र पर आते हैं, तो मादाएँ और उनके बच्चे बड़े समूहों में इकट्ठे होकर सर्दियों का सामना करते हैं, जबकि नर इन बड़े झुंडों से अलग रहते हैं और वसंत के गर्म मौसम के आने तक एक निश्चित दूरी बनाए रखते हैं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली मादाएँ अलग "नर्सरी झुंड" बनाती हैं।
यह प्रजाति खेल-कूद में सक्रिय रहती है - पलटी मारना, हवा में कलाबाज़ी करना और पूरे शरीर के साथ पानी से बाहर कूदना इसकी सामान्य आदतें हैं। इनकी सबसे प्रिय गतिविधि "बो-राइडिंग" है, जिसमें वे जहाजों या व्हेलों द्वारा बनाई गई दबाव लहरों पर सवार होकर घंटों तक खेलती और उछलती रहती हैं। समूह के भीतर वयस्क युवाओं को सिखाते और अनुशासित करते हैं, जबकि माताएँ बारी-बारी से अतिसक्रिय बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी साझा करती हैं।
ये डॉल्फ़िन अपने बीमार साथियों की देखभाल भी करती हैं, उन्हें पंखों के सहारे सतह पर तैराए रखती हैं ताकि वे सांस ले सकें, और समूह के सदस्यों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाती हैं - अलगाव या मृत्यु की स्थिति में उदासी जैसे व्यवहार भी देखे गए हैं। इनके मुख्य प्राकृतिक शत्रु शार्क और किलर व्हेल हैं।
संचार
यह प्रजाति मुख्यतः ध्वनि संचार पर निर्भर करती है, विशेष रूप से अंधेरे या गंदले जल में जहाँ दृष्टि सीमित हो जाती है। ये दो प्रकार की "आवाज़ों" का उपयोग करती हैं - एक नौवहन और स्थान-निर्धारण के लिए, और दूसरी सामाजिक संचार के लिए, जो सीटी जैसी स्पंदित ध्वनियों के रूप में सुनाई देती है।
तेज़ी, गति और स्वर की ऊँचाई में बदलाव करके अलग-अलग संदेश दिए जाते हैं। इसके अलावा स्पर्श (एक-दूसरे को पंखों से सहलाना) और रासायनिक संकेतों का भी उपयोग सामाजिक संबंध बनाने में होता है। बंदी अवस्था में इन्हें बोलना सिखाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन ये स्वभाव से मित्रवत होने के बावजूद प्रशिक्षण में सहज नहीं होतीं और अपेक्षाकृत शर्मीली रहती हैं।
शिकार और आहार
सामान्य डॉल्फ़िन एक कुशल समूह-शिकारी है जो रात और दिन दोनों समय शिकार करती है, प्रायः समूह के सभी सदस्य एक साथ भोजन करते हैं। शिकार अभियान एक घंटे तक चल सकते हैं, जिसमें हर डॉल्फ़िन मछलियों के झुंड के केंद्र की ओर दौड़ती है और जितनी मछलियाँ पकड़ सके, साबुत निगल जाती है।
एक विशेष तकनीक में ये मछलियों के झुंड के नीचे गोता लगाकर उन्हें सतह की ओर धकेलती हैं, जिससे मछलियाँ पूरी तरह पानी से बाहर उछल जाती हैं और डॉल्फ़िन उन्हें हवा में ही पकड़ लेती है। कभी-कभी बॉटलनोज़ या व्हाइट-साइडेड डॉल्फ़िन के दल भी इस शिकार में शामिल हो जाते हैं।
आहार में मुख्यतः छोटी मछलियाँ शामिल हैं - युवा हेरिंग, पिलचर्ड, एंकोवी, रात्रिचर हेक, सार्डिन, छोटी बोनिटो मछली और सॉरी - साथ ही स्क्विड और ऑक्टोपस भी। एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 8 से 9 किलोग्राम (18 से 20 पाउंड) तक मछली खा सकता है।
प्रजनन और बच्चों का पालन
प्रेमालाप वसंत और शरद ऋतु में होता है, जिसमें नर और मादा एक-दूसरे को पंखों से सहलाते हैं, शरीर को आपस में रगड़ते हैं और साथ-साथ तैरते हैं; नर अक्सर मादा की ओर तेज़ी से बढ़ता है जैसे टकराने वाला हो, फिर मुड़ जाता है, जबकि मादा दूर तैरकर प्रतिक्रिया देती है। इस खिलंदड़े प्रेमालाप के बाद संभोग पेट-से-पेट की स्थिति में होता है।
गर्भावस्था लगभग 10 से 12 महीने तक चलती है। नवजात बच्चा पूँछ की ओर से पहले जन्म लेता है और जन्म के समय लगभग 70 से 100 सेंटीमीटर लंबा तथा लगभग 10 किलोग्राम वजनी होता है। सामान्यतः एक बार में एक ही बच्चा जन्म लेता है, हालांकि जुड़वां या तीन बच्चों के मामले भी दर्ज किए गए हैं।
बच्चा जन्म के तुरंत बाद परिवार समूह का हिस्सा बन जाता है और अपनी माँ से कुछ ही फीट की दूरी पर रहता है। चूँकि बच्चे के पास चूसने के लिए उपयुक्त होंठ नहीं होते और पानी के भीतर चूसना संभव नहीं है, माँ मांसपेशियों को सिकोड़कर दूध को सीधे उसके मुँह में छोड़ती है; बच्चा फिर सांस लेने के लिए सतह पर आता है। डॉल्फ़िन का दूध मानव दूध से लगभग छह गुना अधिक प्रोटीनयुक्त और वसायुक्त होता है, जिससे बच्चे का वजन पहले छह महीनों में मानव शिशु की तुलना में दो से तीन गुना तेज़ी से बढ़ता है।
स्तनपान लगभग डेढ़ साल तक चलता है, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों की आबादियों में यह पाँच से उन्नीस महीने तक भिन्न हो सकता है। यौन परिपक्वता की आयु भी क्षेत्र के अनुसार बदलती है - कहीं मादाएँ 2 से 7 साल में और नर 3 से 12 साल में परिपक्व हो जाते हैं, जबकि अन्य अनुमानों में यह आयु 12 से 15 साल तक बताई गई है। इनकी औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।
संरक्षण और खतरे
सामान्य डॉल्फ़िन को IUCN की रेड लिस्ट में "कम चिंताजनक" (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है, जो दर्शाता है कि वर्तमान में इसे विलुप्ति का प्रत्यक्ष खतरा नहीं है। यह मुख्यतः इसकी विशाल वैश्विक आबादी के कारण है - प्रशांत महासागर में जापान के आसपास लगभग 14,28,000, अमेरिकी पश्चिमी तट के निकट शीतोष्ण मध्य प्रशांत में लगभग 9,69,000, और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत में लगभग 29,63,000 व्यक्ति होने का अनुमान है। अटलांटिक महासागर में पश्चिमी अटलांटिक में लगभग 70,000, यूरोपीय जल में लगभग 4,67,000, भूमध्य सागर में 19,400 से अधिक, और काला सागर में कई दस हज़ार व्यक्ति पाए जाते हैं। दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में 20,000-22,000 और दक्षिणी अफ्रीका के निकट 15,000-20,000 व्यक्तियों का अनुमान है।
सबसे बड़ा खतरा बाईकैच (मछली पकड़ने के जालों में फंसना) है। उत्तरी अटलांटिक में हर साल लगभग 1,000 शॉर्ट-बीक्ड सामान्य डॉल्फ़िन ट्यूना ड्रिफ्ट नेट, ट्रॉलिंग और गिलनेट में फंसकर मर जाती हैं। स्पेन के गैलिशिया क्षेत्र में 2001-2002 के दौरान वार्षिक रूप से लगभग 394 डॉल्फ़िन ट्रॉलर मछली पकड़ने में फंसी, ज्यादातर 300 मीटर से कम गहराई वाले महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र में और रात के समय जब भोजन गतिविधि सबसे अधिक होती है। पकड़े गए अधिकतर व्यक्ति नर थे, औसत आयु लगभग 13±4.4 वर्ष, जिससे यह संकेत मिलता है कि गैलिशिया में नर "बैचलर" झुंड अधिक सक्रिय रहते हैं। पश्चिमी उत्तरी अटलांटिक में स्वोर्डफ़िश के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रिफ्टनेट में भी नर मादाओं की तुलना में दोगुनी संख्या में फंसते हैं।
अन्य खतरों में धातु प्रदूषकों का जमाव शामिल है, जो डॉल्फ़िन के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है, और पेरू के तट पर भोजन तथा शार्क-चारे के लिए सीधा शिकार भी होता है। पश्चिमी भूमध्य सागर में 1960 के दशक तक यह प्रजाति प्रचुर मात्रा में थी, लेकिन उसके बाद इसकी उपस्थिति में तेज़ गिरावट आई है, जिसके सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं परंतु इसे मानवीय गतिविधियों से जोड़ा जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में यह एक संरक्षित प्रजाति है, फिर भी कुछ ट्रॉलर जालों में संयोगवश फंस जाती है।
संरक्षण स्थिति
- LC
- NT
- VU
- EN
- CR
संकटमुक्त
सांस्कृतिक महत्व
प्राचीन यूनानी पौराणिक कथाओं में डॉल्फ़िन को समुद्र के देवता पोसाइडन के पवित्र साथी और संदेशवाहक के रूप में देखा जाता था; उन्हें अक्सर पोसाइडन के रथ के साथ चलते या तूफ़ानी समुद्र में जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिखाते हुए दर्शाया जाता था। किंवदंती के अनुसार जब कवि एरियन को समुद्री लुटेरों ने जहाज से समुद्र में फेंक दिया, तो एक डॉल्फ़िन ने उसकी जान बचाई।
डॉल्फ़िन को सुरक्षा, मार्गदर्शन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता था और इन्हें अक्सर पोसाइडन तथा अपोलो जैसे समुद्री देवताओं से जोड़ा जाता था। एक कथा के अनुसार अपोलो ने डेल्फ़ी के दैवज्ञ स्थल की स्थापना के लिए स्वयं डॉल्फ़िन का रूप धारण किया था, और यहीं से शहर "डेल्फ़ी" का नाम "डेल्फिस" (डॉल्फ़िन) शब्द से लिया गया माना जाता है; पोसाइडन ने इस प्राणी के सहयोग के सम्मान में एक डॉल्फ़िन को आकाश में "डेल्फ़िनस" तारामंडल के रूप में अमर कर दिया।
मिथकों से परे, यह प्रजाति नाविकों के लिए वास्तविक जीवन में भी सहायक रही है - यह मनुष्यों को बचाने के लिए जानी जाती है और जहाजों के किनारे खेलकर मल्लाहों का मनोरंजन करती है। मछुआरे कभी-कभी मछलियों के झुंड का पता लगाने के लिए डॉल्फ़िन की गतिविधियों पर निर्भर रहते हैं। प्रशांत महासागर के गिल्बर्ट द्वीपों जैसी कुछ पॉलिनेशियन संस्कृतियों में इसे भोजन के रूप में भी खाया जाता है।
रोचक तथ्य
- Delphinus वंश की यह एकमात्र जीवित प्रजाति है और डेल्फ़िनिडे कुल के डेल्फ़िनिनाए उपकुल की प्रारूप प्रजाति भी है, जो इसे बॉटलनोज़, हम्पबैक, स्ट्राइप्ड, स्पिनर, क्लाइमीन और स्पॉटेड डॉल्फ़िन के साथ-साथ टुकुक्सी और गुयाना डॉल्फ़िन का निकटतम संबंधी बनाती है।
- यूनानी मिथक के अनुसार पोसाइडन ने एक डॉल्फ़िन की सहायता के सम्मान में उसे आकाश में "डेल्फ़िनस" नामक तारामंडल के रूप में स्थापित किया।
- यह विश्व की सबसे प्रचुर सिटेशियन प्रजाति मानी जाती है, फिर भी बंदी अवस्था में यह अपेक्षाकृत शर्मीली हो जाती है और प्रशिक्षण में सहज नहीं होती, जबकि खुले समुद्र में यह बेहद मिलनसार और चंचल स्वभाव दिखाती है।
पारिस्थितिकी
आवास
- समुद्री
- तटीय
व्यवहार
- परभक्षी
- जलीय
- सामाजिक
आहार
- मछली-भक्षी (आहार)
फ़ोटो
स्रोतGBIFiNaturalistWikidataWikipediaEncyclopedia of LifeAnimal Diversity WebAnAge


