नर हम्पबैक व्हेल (Megaptera novaeangliae) का गीत, जो चार से 33 मिनट तक चल सकता है और अनोखी संरचना रखता है, इस प्रजाति को समुद्री जीवों में विशिष्ट बनाता है। यह एक बेलीन व्हेल है, रॉर्क्वाल परिवार Balaenopteridae की सदस्य और Megaptera वंश की एकमात्र जीवित प्रजाति।
यह दुनिया भर के लगभग सभी महासागरों में - आर्कटिक से अंटार्कटिक तक - पाई जाती है, और IUCN रेड लिस्ट में इसे "न्यूनतम चिंता" श्रेणी में रखा गया है।
अपनी बुलंद कलाबाज़ियों, लंबे पेक्टोरल पंखों और जटिल सामाजिक जीवन के कारण यह व्हेल-निहारने वालों के बीच सबसे लोकप्रिय प्रजातियों में से एक है।
पहचान और रूप
सबसे उपयोगी पहचान चिह्न है इसके असामान्य रूप से लंबे पेक्टोरल पंख, जो शरीर की लंबाई का लगभग एक-तिहाई होते हैं, और सिर तथा पंखों के अगले किनारे पर मौजूद उभार (ट्यूबरकल्स) - बड़ी व्हेलों में यह विशेषता अनूठी है। पूंछ के पंख का किनारा भी दांतेदार दिखता है।
वयस्क सामान्यतः 14-15 मीटर लंबे होते हैं, हालांकि 16-17 मीटर तक के व्यक्ति दर्ज किए गए हैं; सबसे लंबे रिकॉर्ड नर के लिए 17.4 मीटर और मादा के लिए 18.6 मीटर हैं, यद्यपि इतनी लंबाई संदेहजनक मानी जाती है। मादाएं नर से लगभग 1 से 1.5 मीटर लंबी होती हैं, और वयस्क का वज़न 40 मेट्रिक टन तक पहुंच सकता है। बछड़े जन्म के समय लगभग 4.3 मीटर लंबे और 680 किलोग्राम वज़नी होते हैं।
शरीर भारी और थुलथुला होता है, रोस्ट्रम पतला होता है, और गले पर 14 से 35 खांचे होते हैं। ऊपरी जबड़े में 540 से 800 काली बेलीन प्लेटें लगी होती हैं। ऊपरी भाग सामान्यतः काला होता है जबकि निचला भाग काले और सफेद का मिश्रण होता है; दक्षिणी गोलार्ध की व्हेलों में सफेद रंग अधिक पाया जाता है। कुछ व्यक्ति पूरी तरह सफेद होते हैं, जैसे सच्ची अल्बिनो व्हेल "मिगालू"। पूंछ के पंख के पैटर्न और निशान व्यक्तिगत पहचान में सहायक होते हैं।
मादा को उसके जननांग विदर के अंत में मौजूद गोलाकार "हेमिस्फेरिकल लोब" से पहचाना जा सकता है, जो नर-मादा भेद का प्रमुख संकेत है। दृष्टि अपेक्षाकृत कमजोर होती है - दूर से केवल छायाकृति और नज़दीक से ही बारीक विवरण देखे जा सकते हैं, जबकि कान 15 हर्ट्ज़ से 3 किलोहर्ट्ज़ तक की आवृत्तियां सुन सकते हैं, जो इसके गीतों की आवृत्ति सीमा से मेल खाता है।
वितरण और आवास
यह प्रजाति ध्रुवीय से उष्णकटिबंधीय जल तक, आर्कटिक, अटलांटिक व प्रशांत महासागरों तथा अंटार्कटिक के आसपास के जल में पाई जाती है; सबसे उत्तरी रिकॉर्ड उत्तरी फ्रांज जोसेफ लैंड के पास 81°N पर है। यह मुख्यतः तटीय होती है और महाद्वीपीय शेल्फ के जल में एकत्रित होती है।
गर्मियों में यह व्हेल 35 से 65° अक्षांश के उच्च-उत्पादकता वाले क्षेत्रों में - फियोर्ड, चैनल, बैंक और शेल्फ किनारों पर - भोजन करती है, कभी-कभी 200 मीटर गहराई तक गोता लगाती है। सर्दियों में यह 0 से 35° अक्षांश के उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय जल (20-28°C) की ओर प्रजनन के लिए प्रवास करती है, कभी-कभी एक ही दिशा में 8,000 किलोमीटर तक की यात्रा करते हुए।
उत्तर अटलांटिक में दो शीतकालीन आबादियां हैं - एक वेस्ट इंडीज़ (क्यूबा से उत्तरी वेनेज़ुएला तक) और दूसरी केप वर्डे व उत्तरपश्चिम अफ्रीका के पास - जो गर्मियों में क्रमशः न्यू इंग्लैंड/ग्रीनलैंड और आइसलैंड/नॉर्वे की ओर जाती हैं। उत्तर प्रशांत में कम से कम चार प्रजनन आबादियां हैं - मेक्सिको, मध्य अमेरिका, हवाई द्वीप और ओकिनावा/फिलीपींस - जो अलास्का, कैलिफ़ोर्निया और रूसी सुदूर पूर्व तक भोजन खोजती हैं। अरब सागर (ओमान के आसपास) में एक अलग-थलग, अप्रवासी आबादी भी पाई जाती है। दक्षिणी गोलार्ध में सात प्रजनन भंडार (A से G) पहचाने गए हैं, जो दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिणी हिंद महासागर व ओशिनिया के तटों से लेकर अंटार्कटिक प्रायद्वीप और दक्षिण जॉर्जिया तक फैले हैं।
GBIF के मासिक उपस्थिति आंकड़े - जो जनसंख्या नहीं बल्कि केवल देखे जाने के रिकॉर्ड दर्शाते हैं - अगस्त में सबसे अधिक (75,204) और जुलाई में भी उच्च (64,273) रहते हैं, जबकि अप्रैल में सबसे कम (20,573) दर्ज हुए हैं; यह संभवतः ग्रीष्मकालीन भोजन क्षेत्रों में मौसमी मौजूदगी की ओर इशारा करता है, हालांकि इसे सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए।

व्यवहार और जीवनशैली
गर्मी और सर्दी के दौरान इसका व्यवहार बिल्कुल विपरीत होता है। गर्मियों में यह व्हेल अपेक्षाकृत स्थिर समूहों में साथ भोजन करती है, जिसमें ध्वनियों द्वारा समन्वित सहयोग और श्रम-विभाजन होता है; अलास्का तट पर प्रसिद्ध "बबल-नेट" तकनीक इसका उदाहरण है। सर्दियों में भोजन लगभग बंद हो जाता है, प्रजनन और बछड़ों की देखभाल केंद्र में आ जाती है, और नरों के बीच मादाओं तक पहुंच के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा होती है।
सर्दियों में कुछ पहचाने जाने योग्य समूह-प्रकार देखे जाते हैं: अकेले घूमते किशोर या वयस्क; अकेले "गायक" नर जो घंटों तक एक ही क्षेत्र में गीत गाते रहते हैं; नर-मादा जोड़े; नवजात बछड़े वाली मां; मां-बछड़ा-एस्कॉर्ट समूह, जिनमें एक नर मादा के मद में आने की प्रतीक्षा करता है; और तीन से पंद्रह तक के आक्रामक "प्रतिस्पर्धा समूह", जिन्हें प्राथमिक रूप से नरों के बीच का संघर्ष माना जाता है।
सतह पर यह व्हेल अत्यधिक सक्रिय रहती है - ब्रीचिंग, पूंछ व पंख से पानी पर थपकी (लॉबटेलिंग) जैसे प्रदर्शन, जो संचार, खेल या परजीवी हटाने से जुड़े हो सकते हैं; तेज़ हवा में इन प्रदर्शनों की आवृत्ति बढ़ जाती है, संभवतः संकेतों को अधिक दूरी तक पहुंचाने के लिए। सामान्य गोता 6-7 मीटर गहरा और 15-20 मिनट का होता है, जबकि गहरे गोते 616 मीटर तक दर्ज हुए हैं। सामान्य तैराकी गति 7.9-15.1 किमी/घंटा है, जो खतरे में 27 किमी/घंटा तक बढ़ सकती है, और इसके लंबे पंख किसी भी दिशा में मुड़ने की क्षमता देते हैं।
ओर्का बछड़ों और यहां तक कि वयस्कों पर भी हमला करते हैं, जिसके निशान अक्सर शरीर पर दिखते हैं; मां और साथी वयस्क बछड़ों की रक्षा के लिए उनके साथ चलते हैं। टाइगर शार्क, डस्की शार्क और यहां तक कि ग्रेट व्हाइट शार्क द्वारा कमज़ोर या फंसी व्हेलों पर हमले भी दर्ज किए गए हैं।
संचार
नर हम्पबैक व्हेल सर्दियों के प्रजनन काल में जटिल गीत गाते हैं, जिनकी आवृत्ति 100 हर्ट्ज़ से 4 किलोहर्ट्ज़ तक होती है और हार्मोनिक्स 24 किलोहर्ट्ज़ या अधिक तक पहुंच सकते हैं; ये गीत कम से कम 10 किलोमीटर दूर तक सुने जा सकते हैं। सामान्यतः यह गायन चार से 33 मिनट तक चलता है, पर हवाई में लगातार सात घंटे तक गाते हुए भी दर्ज किया गया है। गीत "सबयूनिट", "यूनिट", "सबफ्रेज़", "फ्रेज़" और "थीम" में संरचित होते हैं, और इनकी बनावट मानव भाषाओं की तरह ज़िफ के नियम का पालन करती प्रतीत होती है।
इन गीतों का उद्देश्य अभी भी बहस का विषय है। नर के बीच प्रभुत्व स्थापित करने के प्रमाण सीमित हैं, हालांकि गैर-गायक नर कभी-कभी गायकों को आक्रामक रूप से बाधित करते देखे गए हैं। अकेले गाने वाले नर की ओर मादाएं आकर्षित नहीं होतीं, पर वे कई गायक नरों के जमावड़े की ओर खिंच सकती हैं - कुछ हद तक "लेक" प्रणाली जैसी। समय के साथ गीत बदलते रहते हैं और पड़ोसी आबादियों में फैल जाते हैं; उत्तरी गोलार्ध में यह बदलाव धीरे-धीरे होता है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में गीत चक्रीय "क्रांतियों" से गुज़रते हैं।
इसके अलावा अन्य ध्वनियां भी दर्ज की गई हैं - तेज़, कम-आवृत्ति के "स्नॉर्ट" मां-बछड़ा-एस्कॉर्ट समूहों में आपसी संपर्क बनाते हैं; लंबे "ग्रम्बल" शरीर के आकार और सामाजिक स्थिति का संकेत दे सकते हैं; "थ्वॉप" और "वॉप" संपर्क कॉल के रूप में काम करते हैं; ऊंची पिच वाली "क्राई", "वायलिन" और "श्रीक" प्रतिस्पर्धी समूहों में सुनी जाती हैं; और छोटे "ग्रन्ट" व "बार्क" तब सुने जाते हैं जब कोई व्हेल किसी नए समूह में शामिल होती है।
शिकार और आहार
शिकार पकड़ने के लिए हम्पबैक व्हेल कई सुनियोजित तकनीकें अपनाती है। "रिंग ऑफ फोम" तकनीक में व्हेल सतह पर गोलाई में तैरते हुए पूंछ से पानी पर मार-मार कर एक झागदार घेरा बनाती है, फिर उसके नीचे गोता लगाकर मुंह खोले हुए घेरे के बीच में उभरती है और घिरे हुए शिकार को निगल जाती है। "लंजिंग" में व्हेल घने प्लवक या मछली-समूह में सीधी या तिरछी ऊपर की ओर तेज़ी से तैरती है। बबल क्लाउड और बबल कॉलम तकनीकों में सांस छोड़कर बुलबुलों का बादल या स्तंभ बनाया जाता है, जो अर्धवृत्त या पूर्ण वृत्त बनाकर शिकार को जाल की तरह घेर या भ्रमित कर देता है। इसके अलावा पूंछ से पानी पर बार-बार मार कर शिकार जुटाने की विधि, तेज़ 180° घुमाव वाली "इनसाइड लूप" विधि, और केवल क्रिल के लिए इस्तेमाल होने वाली "फ्लिक-फीडिंग" विधि भी देखी गई है; कई बार बबल-तकनीक और पूंछ-थपकी को मिलाकर सैंड लांस जैसी मछलियां पकड़ी जाती हैं। दो वर्ष से छोटे बछड़े पूंछ-थपकी विधि का उपयोग नहीं करते, हालांकि वे एक वर्ष की उम्र में ही दूध छोड़ चुके होते हैं।
यह प्रजाति सामान्यीकृत और अवसरवादी भक्षक है - यह "निगलने वाली" प्रकार की भक्षक है, न कि सतह-छानने वाली। गले की खांचें फैलकर बड़ी मात्रा में पानी और शिकार को मुंह में समेटती हैं; मुंह बंद होने पर पानी बाहर धकेला जाता है और शिकार बेलीन प्लेटों में फंसकर जीभ की सहायता से निगल लिया जाता है।
क्षेत्र के अनुसार आहार बदलता है: उत्तर प्रशांत और बेरिंग सागर में अटका मैकेरल और पैसिफिक सॉरी प्रमुख शिकार हैं, साथ ही यूफौज़िड (क्रिल), मैकेरल, सैंड लांस, कैपेलिन और हेरिंग भी खाए जाते हैं। उत्तर अटलांटिक में मछलियां आहार का लगभग 95% हिस्सा बनाती हैं, विशेष रूप से केप कॉड और ग्रीनलैंड के पास सैंड लांस, हेरिंग और पोलक। ऑस्ट्रेलिया व अंटार्कटिक क्षेत्र की व्हेलें मुख्यतः यूफौज़िड पर निर्भर रहती हैं।
भोजन मुख्यतः गर्मियों में होता है; सर्दियों में यह व्हेल सामान्यतः उपवास करती है, हालांकि मेक्सिको में बाजा कैलिफ़ोर्निया सुर और नायरित तटों के पास अवसरवादी शीतकालीन भोजन भी दर्ज किया गया है।
प्रजनन और बच्चों का पालन
संभोग सर्दियों में उष्णकटिबंधीय जल में होता है, जब मादाएं मद में आती हैं और नर टेस्टोस्टेरोन व शुक्राणु उत्पादन के शिखर पर पहुंचते हैं। यह प्रजाति बहुसंगी है - एक नर मादा के सबसे निकट "मुख्य एस्कॉर्ट" बनकर अन्य "चुनौतीकर्ता" नरों से पूंछ-थपकी, टकराव और सिर-टक्कर के ज़रिए लड़ता है, जबकि "द्वितीयक एस्कॉर्ट" थोड़ी दूरी बनाकर पीछा करते हैं। प्रेमालाप के दौरान बुलबुलों के ज़रिए मादा को उत्तेजित करने जैसा व्यवहार भी हवाई और कुक द्वीपों के पास दर्ज किया गया है।
गर्भावस्था 11 से 11.5 महीने तक चलती है, जिसके दौरान भ्रूण प्रति माह लगभग 17 से 35 सेंटीमीटर बढ़ता है; भ्रूण में पहले दांत विकसित होते हैं जो बाद के महीनों में बेलीन में बदल जाते हैं। मादा सामान्यतः हर दो वर्ष में एक बार प्रजनन करती है, हालांकि कभी-कभी तीन वर्षों में दो बार भी गर्भधारण होता है, जिस स्थिति में दुग्धपान लंबा खिंच सकता है।
जन्म से पहले मां एस्कॉर्ट नरों की परेशानी से बचने के लिए तट के निकट शांत, उथले जल में चली जाती है और सर्दियों के मध्य में सामान्यतः एक ही बछड़े को जन्म देती है। मादागास्कर के पास दर्ज किया गया एक जन्म केवल चार मिनट में पूरा हुआ; मां अक्सर नवजात बछड़े को सतह तक पहुंचने में सहायता करती है।
बछड़ा एक वर्ष तक दूध पीता है, हालांकि छह महीने की उम्र से ही ठोस भोजन भी लेने लगता है; उसका पृष्ठीय पंख शुरू में मुड़ा हुआ होता है और उम्र के साथ सीधा व मज़बूत हो जाता है - मुड़े पंख वाले बछड़े अधिक तैरते और बार-बार सांस के लिए सतह पर आते हैं, जबकि सीधे पंख वाले लंबे समय तक सांस रोक पाते और आराम कर सकते हैं। नर की ओर से बच्चे के पालन-पोषण में कोई योगदान नहीं होता; यौन परिपक्वता आबादी के अनुसार चार से पंद्रह वर्ष के बीच आती है, जबकि शारीरिक परिपक्वता आठ से बारह वर्ष में मानी जाती है।
संरक्षण और खतरे
IUCN रेड लिस्ट में 2018 के आकलन के अनुसार यह प्रजाति "न्यूनतम चिंता" श्रेणी में है, जिसकी वैश्विक जनसंख्या लगभग 135,000 आंकी गई है, जिनमें से करीब 84,000 प्रजनन-सक्षम वयस्क हैं। क्षेत्रीय अनुमान इस प्रकार हैं - उत्तर अटलांटिक में लगभग 13,000, उत्तर प्रशांत में लगभग 21,000 और दक्षिणी गोलार्ध में लगभग 80,000। इसके विपरीत, अरब सागर की अलग-थलग आबादी में मात्र लगभग 80 व्यक्ति बचे हैं, जिसे क्षेत्रीय रूप से संकटग्रस्त माना जाता है।
आधुनिक व्हेलिंग युग में यह प्रजाति भारी शिकार का शिकार बनी - 1910 से 1916 के बीच दक्षिणी गोलार्ध में 60,000 से अधिक व्हेलें मारी गईं, और उत्तर प्रशांत में 1962-63 के दौरान एक साल में 3,000 से अधिक व्हेलें मारी गईं। सोवियत संघ ने आंकड़े छिपाए - 1947 से 1972 के बीच केवल 2,820 का आधिकारिक रिकॉर्ड दिया गया जबकि वास्तविक शिकार 48,000 से अधिक था। 1966 तक वैश्विक आबादी घटकर लगभग 5,000 रह गई थी। उत्तर अटलांटिक में 1956 में, दक्षिणी गोलार्ध में 1963 में, और उत्तर प्रशांत में 1966 में शिकार पर प्रतिबंध लगा, और 1985 में अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग ने व्यावसायिक व्हेलिंग पर पूर्ण रोक लगाई।
वर्तमान में मुख्य खतरे मछली पकड़ने के जालों में फंसना, जहाज़ों से टक्कर (विशेष रूप से मैगेलन जलडमरूमध्य के आसपास), मानव-जनित शोर, तटीय आवास विनाश और जलवायु परिवर्तन हैं। दूषित मैकेरल से saxitoxin विषाक्तता से भी मौतें दर्ज की गई हैं। 2016 से 2019 के बीच अमेरिकी अटलांटिक तट पर 88 व्हेलें फंसी मिलीं, जो 2013-16 की तुलना में दोगुनी थीं, जिसके कारण NOAA ने 2017 में इसे "असामान्य मृत्यु घटना" घोषित किया और जहाज़ टक्कर व जाल में फंसने को प्रमुख कारण बताया।
संरक्षण प्रयासों में कोस्टा रिका का Ballena Marine National Park और 1992 में स्थापित Hawaiian Islands Humpback Whale National Marine Sanctuary शामिल हैं; इन प्रयासों के चलते अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में इस प्रजाति को संकटग्रस्त सूची से हटाया गया है।
सांस्कृतिक महत्व
माओरी संस्कृति में समुद्र में जीवित बचने के बाद काहुतिया-ते-रांगी ने "पाइकिया" नाम अपनाया, जो हम्पबैक व्हेल के लिए माओरी शब्द से लिया गया है - वही व्हेल जिसने उन्हें आओतेआरोआ (न्यूज़ीलैंड) तक सुरक्षित पहुंचाया था और जिसे बुलाने के लिए उन्होंने समुद्री देवता तांगारोआ का आवाहन किया था। यह घटना माओरी परंपरा को दर्शाती है, जिसमें लोग किसी गहरे अनुभव या उपलब्धि के बाद नया नाम अपनाकर उस घटना को स्मरणीय बनाते थे।
ऐतिहासिक रूप से इसका मानव जीवन में बड़ा आर्थिक महत्व रहा है - यह उन नौ प्रमुख प्रजातियों में शामिल थी जिनका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था। इसका तेल लैंप जलाने और मशीनों के लुब्रिकेंट के रूप में उपयोग होता था, और यह मार्जरीन तथा खाना पकाने की चर्बी के कच्चे माल के रूप में भी इस्तेमाल होता था; मांस मानव भोजन व पशु आहार के लिए संसाधित किया जाता था और हड्डियों का चूर्ण खाद के रूप में उपयोग होता था।
आज बड़े पैमाने पर शिकार समाप्त हो चुका है, और अब यह प्रजाति इकोटूरिज़्म से जुड़ी है। 1975 में न्यू इंग्लैंड और हवाई में व्हेल-देखने की यात्राएं शुरू हुईं, जो अब हवाई की अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ डॉलर की आय देती हैं।
रोचक तथ्य
- Megaptera novaeangliae अपने वंश Megaptera की एकमात्र जीवित प्रजाति है।
- कुछ व्यक्ति पूरी तरह सफेद रंग के होते हैं - जैसे "मिगालू" नाम की व्हेल, जो सच्ची अल्बिनो मानी जाती है।
- उपन्यासकार हरमन मेलविल ने "मोबी डिक" (1851) में इस प्रजाति को सभी व्हेलों में सबसे "चंचल व हल्के-फुल्के मन" वाला बताया, जबकि प्राणीविज्ञानी कोप ने 1871 में इसे "Megaptera bellicosa" यानी "युद्धप्रिय" नाम दिया - दो बेहद विपरीत छवियां एक ही प्रजाति की।
- सिर और पंखों के ट्यूबरकल्स के भीतर एक भंगुर बाल होता है और वे तंत्रिकाओं से भरपूर होते हैं, जो संभवतः संवेदी कार्य करते हैं।
- इसके मस्तिष्क में "स्पिंडल कोशिकाएं" पाई गई हैं, जो मनुष्यों में सामाजिक समझ (थियरी ऑफ माइंड) से जुड़ी मानी जाती हैं।
- सीयामस बूपिस नामक व्हेल-जूं प्रजाति केवल हम्पबैक व्हेल की त्वचा पर ही पाई जाती है।
- Coronula diadema और Coronula reginae जैसे बार्नकल इसकी त्वचा पर चिपकते हैं - ये परजीवी नहीं बल्कि "एपिबायंट" हैं जो केवल तैराकी में थोड़ा प्रतिरोध बढ़ाते हैं।
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पारिस्थितिकी और वर्गीकरण
वर्गीकरण
- संघ
- Chordata
- वर्ग
- Mammalia
- गण
- Cetacea
- कुल
- Balaenopteridae
- वंश
- Megaptera
- प्रजाति
- Megaptera novaeangliae
स्रोत
- GBIF Species names and classification
- iNaturalist Photos
- Wikidata Common names and conservation status
- Wikipedia Summary extract
- Encyclopedia of Life Habitat, diet and behavior traits
- Animal Diversity Web Animal habitat, behavior and diet
- AnAge Longevity



